April 25, 2026 आब-ओ-हवा इत्यादि चुनाव है, खड़े होने का नहीं बैठने का मज़ा हास्य-व्यंग्य डॉ. मुकेश असीमित की कलम से…. चुनाव है, खड़े होने का नहीं बैठने का मज़ा आप कहेंगे, चुनाव तो खड़े होने के... Continue Reading
April 19, 2026 आब-ओ-हवा इत्यादि विक्रम, बैताल और भांडतंत्र हास्य-व्यंग्य श्रीकांत आप्टे की कलम से…. विक्रम, बैताल और भांडतंत्र हठी राजा विक्रम फिर चल पड़ा जंगल की ओर। जंगल पहुंच कर उसने... Continue Reading
April 12, 2026 आब-ओ-हवा इत्यादि डॉक्टर हड़ताल पर हैं! हास्य-व्यंग्य डॉ. मुकेश असीमित की कलम से…. डॉक्टर हड़ताल पर हैं! आज का दिन मेरी ज़िंदगी के सबसे मनहूस दिनों में बाक़ायदा दर्ज... Continue Reading
March 31, 2026 आब-ओ-हवा रंग-बिरंगी नामचीन साहित्यकारों के रोचक कटाक्ष-3 पाक्षिक ब्लॉग विवेक मेहता की कलम से…. नामचीन साहित्यकारों के रोचक कटाक्ष-3 पिछली दो कड़ियों में हिंदी साहित्य जगत के स्वनामधन्य लेखकों/कलमकारों के... Continue Reading
March 25, 2026 आब-ओ-हवा इत्यादि आश्वासन पुराण हास्य-व्यंग्य मुकेश असीमित की कलम से…. आश्वासन पुराण सभा-मण्डप में धूप के छिन्न-भिन्न कण थिरक रहे थे। मध्य आसन पर विराजित महामुनि ने दीर्घ... Continue Reading
March 10, 2026 आब-ओ-हवा नज़रिया मोदी जी की उपलब्धियां हास्य-व्यंग्य श्रीकांत आप्टे की कलम से…. मोदी जी की उपलब्धियां बारह साल हो गये मोदीजी को प्रधानमंत्री बनकर। तीसरी बार प्रधानमंत्री पद की शपथ... Continue Reading
February 28, 2026 आब-ओ-हवा रंग-बिरंगी रंग-बिरंगी: नामचीन साहित्यकारों की चुटकियां प्रस्तुति विवेक मेहता…. रंग-बिरंगी: नामचीन साहित्यकारों की चुटकियां हास्य-व्यंग्य बात ही बात में बड़ी सीख दे जाते हैं। सहनशीलता, समझदारी की परीक्षा लेते हुए... Continue Reading
February 11, 2026 आब-ओ-हवा इत्यादि एआई का झोला-छाप क्लिनिक हास्य-व्यंग्य मुकेश असीमित की कलम से…. एआई का झोला-छाप क्लिनिक तकनीक गड़बड़झाला का एक झोल सामने आया है। अख़बार में विज्ञापनों के... Continue Reading
February 8, 2026 आब-ओ-हवा इत्यादि रब्त हास्य-व्यंग्य मुदित रेवातटी की कलम से…. रब्त परसों बड़ी मेहनत से ग़ज़ल कहने की कोशिश की। जैसे ही मुक़म्मल हुई, फटाक से जाकर... Continue Reading
January 29, 2026 आब-ओ-हवा इत्यादि खेद है – एक राष्ट्रीय भावना का आधुनिक संस्करण ‘मान’ सहज व रोचक अंदाज़ में उस परिदृश्य को सामने लाती है, जो इस शती के पूर्वार्द्ध तक के समाज की तस्वीर रहा है। अंत में कहानी के पारंपरिक... Continue Reading