‘दिवास्वप्न’ अब साकार होने लगा है

(विधाओं, विषयों व भाषाओं की सीमा से परे.. मानवता के संसार की अनमोल किताब -धरोहर- को हस्तांतरित करने की पहल। जीवन को नये अर्थ, नयी दिशा, नयी सोच देने...

सार्वभौमिक और सार्वकालिक ‘द जंगल’

(विधाओं, विषयों व भाषाओं की सीमा से परे.. मानवता के संसार की अनमोल किताब -धरोहर- को हस्तांतरित करने की पहल। जीवन को नये अर्थ, नयी दिशा, नयी सोच देने...

एक और तस्वीर

     एक और तस्वीर –सलमा सिद्दीक़ी        हमारे यहां उस समय बम्बई के राइटरों और शायरों की एक गोष्ठी होने वाली थी। राइटर और शायरों से अदबी जलसों और...

कितने अभिन्न लोगों को मैंने चिट्ठियां नहीं लिखीं!

कितने अभिन्न लोगों को मैंने चिट्ठियां नहीं लिखीं! “उसके लिए चिट्ठियांभाषा के बन्द दरवाज़ों कोखोलती गयींदरवाज़ा खुला अधखुला रह गयाबन्द हो गया चिट्ठियों का दरवाज़ा” तब गांव में घर...