कितने अभिन्न लोगों को मैंने चिट्ठियां नहीं लिखीं!

कितने अभिन्न लोगों को मैंने चिट्ठियां नहीं लिखीं! “उसके लिए चिट्ठियांभाषा के बन्द दरवाज़ों कोखोलती गयींदरवाज़ा खुला अधखुला रह गयाबन्द हो गया चिट्ठियों का दरवाज़ा” तब गांव में घर...
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