संदर्भ: आती हुई तिथियों पर कमलकांत सक्सेना (05.10.1948-31.08.2012) और महेश अनघ (14.09.1947-04.12.2012) को याद करने के अवसर विशेष.. पाक्षिक ब्लॉग भवेश दिलशाद की कलम से…. कमलकांत जी, अनघ जी.....
सूचना-मुक्त होते हुए हम भारत-पाकिस्तान की सरहदों पर संघर्ष हुआ, फिर जंगबंदी हो गयी। जंग के हिमायती एक बहुत बड़े जनसमूह ने मर्यादा की लक्ष्मण रेखाएं भी पार कर...
हम बोलेंगे सफ़र बड़ा है सोच से.. भवेश दिलशाद याद आते हैं पिता, जिनकी संगठनात्मक क्षमता, जिजी-विषा, निडरता बेमिसाल थी। मेरे हिस्से में उनके बाक़ी गुण भले बहुत सीमाओं...