लोककला में क्या कुछ नया होता ही नहीं?

पाक्षिक ब्लॉग शम्पा शाह की कलम से…. लोककला में क्या कुछ नया होता ही नहीं?        पिछली कड़ी में हमने कलावंत कुम्हार कालीपद जी के उस प्रसंग...

सोनाबाई और उनके मौन का विस्तार

पाक्षिक ब्लॉग शम्पा शाह की कलम से…. सोनाबाई और उनके मौन का विस्तार            …तो मैं बता रही थी 1983 में सोनाबाई को राष्ट्रपति पुरस्कार...

सोनाबाई… अपने अकेलेपन से मौलिक प्रतिशोध

पाक्षिक ब्लॉग शम्पा शाह की कलम से…. सोनाबाई… अपने अकेलेपन से मौलिक प्रतिशोध            उनके घर के बरामदे में बनी मिट्टी की जालियों की ओर...

अक्षर ब्रह्म-नाद ब्रह्म और संत वाणियां

पाक्षिक ब्लॉग शम्पा शाह की कलम से…. अक्षर ब्रह्म-नाद ब्रह्म और संत वाणियां               स्कूल के दिनों में जब संत कवियों को पढा...

स्वर, रंग-रूप, भंगिमा, आकाश और अन्य तत्व

पाक्षिक ब्लॉग शम्पा शाह की कलम से…. स्वर, रंग-रूप, भंगिमा, आकाश और अन्य तत्व              उन दिनों भोपाल में रहना वाक़ई सौभाग्य था। कभी...
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