मम्मी की फिल्मी यादें और कल्पना की दास्तान

पाक्षिक ब्लॉग मिथलेश रॉय की कलम से…. मम्मी की फिल्मी यादें और कल्पना की दास्तान            मम्मी जी ज़मींदार घर से थीं, ब्याह भी वैसे...

“जय-जय जननी जन्मभूमि, हम बालक हैं तेरे”

मिथलेश रॉय की कलम से…. जय-जय जननी जन्मभूमि, हम बालक हैं तेरे             समय की रहगुज़र से गुज़रते हुए हम कहां चले जा रहे...

‘वो अक्सर याद आते हैं’ यानी एक भूला-बिसरा अभिनेता

मिथलेश रॉय की कलम से…. ‘वो अक्सर याद आते हैं’ यानी एक भूला-बिसरा अभिनेता               गुलशेर भाई जितना मीठा बोलते थे, उतना ही...

‘दिलीप-देव-राज कपूर उसके सामने थे ही क्या!’

‘दिलीप-देव-राज कपूर उसके सामने थे ही क्या!’               सरदार दिलीप सिंह उर्फ दलीप सिंह आज मुझसे नाराज़ हैं। उन्होंने बोलना शुरू किया ‘मैं...

मुहब्बत कर लो जी, कर लो अजी किसने रोका है

मुहब्बत कर लो जी, कर लो अजी किसने रोका है           एक थे सरदार दलीप सिंह, उनका सही नाम दिलीप सिंह था पर वे अपने को दलीप सिंह ही...

एक नरगिस का सफ़रनामा..

एक नरगिस का सफ़रनामा.. एक दृश्य शुरू होता है, एक युवक एक युवती के साथ चाय वाले के पास पहुंचकर चाय मांगता है लेकिन श्रीमान 420 कड़का है। पैसे...

तुम अपना रंजो-ग़म.. मुझे दे दो

तुम अपना रंजो-ग़म.. मुझे दे दो फ़िल्म के पर्दे पर तो नायक की भूमिका कई निभाते हैं पर असल जीवन में नायक बहुत कम लोग हो पाते हैं। प्रेम...