स्टेच्यू ऑफ लिबर्टी: सबकी स्वतंत्रता का प्रतीक

विवेक रंजन श्रीवास्तव नवंबर से अमेरिका प्रवास पर हैं और अन्य देशों की यात्राओं पर भी जाने वाले हैं। इस दौरान वह रोज़ाना शब्दों को समय दे रहे हैं।...

काल के कपाल पर

हास्य-व्यंग्य डॉ. मुकेश असीमित की कलम से…. काल के कपाल पर             कहते हैं, काल के कपाल पर पहले से ही हमारा भूत, वर्तमान...

ज्योत्स्ना… तेरी राजी

याद बाक़ी… पिछले दिनों लेखक राजी सेठ हमारे बीच नहीं रहीं, आब-ओ-हवा की ओर से विनम्र श्रद्धांजलि। कथा संसार के साथ ही उनका पत्र साहित्य भी पठनीय और चर्चित...

मोमो

संस्मरण ख़ुदेजा ख़ान की कलम से…. मोमो             कभी-कभी जीवन में अचानक कोई इस तरह दाख़िल हो जाता है कि उसकी उपस्थिति की आदत...

लाल बिंदी वाली इरफ़ाना

याद बाक़ी…संस्मरण (कुछ वर्ष पहले लिखित) रामप्रकाश त्रिपाठी की कलम से…. लाल बिंदी वाली इरफ़ाना              शब्दशिल्पियों के आसपास में नेहा शरद की फ़ेसबुक...

देश में अभूतपूर्व पत्रकारिता का दौर

हास्य-व्यंग्य आदित्य की कलम से…. देश में अभूतपूर्व पत्रकारिता का दौर              बहुत-से लोगों के लिए यह निराशाजनक तथ्य है कि आधुनिक भारत में...

विद्यालयों को आनंदघर बनाने की ज़रूरत

याद बाक़ी – प्रमोद दीक्षित मलय की कलम से…. विद्यालयों को आनंदघर बनाने की ज़रूरत               समाज एवं शिक्षकों के समक्ष विद्यालयों को...

विद्यालय को ‘आनंदघर’ बनाने में समुदाय की भूमिका

पत्र लेखन प्रमोद दीक्षित मलय की कलम से…. विद्यालय को ‘आनंदघर’ बनाने में समुदाय की भूमिका             आदरणीय अध्यक्ष एवं सदस्यगण, विद्यालय प्रबंध समिति...

मौलाना आज़ाद: आईआईटी, आईआईएम, अकादमियों के जनक

राष्ट्रीय शिक्षा दिवस पर विशेष तौर से ​पढ़िए भारतीय शिक्षा व्यवस्था में अबुल कलाम आज़ाद का योगदान प्रमोद दीक्षित मलय की कलम से…. मौलाना आज़ाद: आईआईटी, आईआईएम, अकादमियों के...
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