‘गूंज बाक़ी’ में एक यादगार संस्मरण, सौजन्य-प्रस्तुति: विवेक मेहता…. जैनेंद्र-ओशो की मुलाक़ात : चूहा-बिल्ली का खेल जैनेंद्र कुमार और रजनीश दो अलग-अलग व्यक्तित्व।...
विवेक रंजन श्रीवास्तव विदेशों की यात्राओं पर हैं। इस दौरान वह नियमित रूप से शब्दों को समय दे रहे हैं। आब-ओ-हवा पर विशेष रूप से इस वैचारिकी, नोट्स, अनुभव...