गीत विमर्श की इस यात्रा का नया मोड़

नियमित ब्लॉग राजा अवस्थी की कलम से…. गीत विमर्श की इस यात्रा का नया मोड़              आब-ओ-हवा के तीसरे अंक से ‘समकाल का नवगीत...

कविता अपने समय को व्यक्त कर पा रही है?

पाक्षिक ब्लॉग राजा अवस्थी की कलम से…. कविता अपने समय को व्यक्त कर पा रही है? मनुष्य सभ्यता के इतिहास में या कहें कि मनुष्य सभ्यता के विकास को...

साहित्य की सकारात्मक दृष्टि

पाक्षिक ब्लॉग राजा अवस्थी की कलम से…. साहित्य की सकारात्मक दृष्टि             साहित्कार, साहित्य, दर्शन और आलोचना के लिए दृष्टि महत्वपूर्ण है। दृष्टि के...

कविता की आज़ादी का पर्व?

राजा अवस्थी की कलम से…. कविता की आज़ादी का पर्व? 15 अगस्त, स्वतंत्रता दिवस, आज़ादी का पर्व जब हम मना रहे हैं, तो यह सोचने की बात है, कि...

जड़ ब्राह्मणवाद से ग्रसित साहित्य समाज

जड़ ब्राह्मणवाद से ग्रसित साहित्य समाज               साहित्य बड़ी ऊँची चीज़ है। साहित्य किसी आदमी के साहित्यकार बनते ही उसे भी ऊँची चीज़...

कविता, लोकप्रियता और ब्राह्मणवाद-2

कविता, लोकप्रियता और ब्राह्मणवाद-2 …पिछले अंक से जारी             पिछले सत्तर साल से जिसे कविता कहा जा रहा है, उसकी उपस्थिति समाज में शून्य है। और विनोद कुमार शुक्ल...

कविता, लोकप्रियता और ब्राह्मणवाद-1

कविता, लोकप्रियता और ब्राह्मणवाद-1                हिन्दी गद्य कविता के बड़े कवि, उपन्यासकार विनोद कुमार शुक्ल कभी चर्चा में थे, किन्तु लम्बे समय से...

लोक के बीच पहुंचने का रास्ता हो सकता है कवि सम्मेलन?

लोक के बीच पहुंचने का रास्ता हो सकता है कवि सम्मेलन? जबकि यह प्रमाणित है कि किसी भी तरह के साहित्य अथवा कला का जीवन लोक के भीतर ही...
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