आलोक चटर्जी: सिगरेट जो धुआं हो गयी

रंगकर्मी आलोक चटर्जी को गये एक बरस हो गया। भवेश दिलशाद की यह टिप्पणी आब-ओ-हवा के अंक 19 में प्रकाशित हुई थी, जिसे प्रसंगवश यहां प्रस्तुत किया जा रहा...

रतन थियम: सांस्कृतिक प्रतिरोध की आवाज़

रतन थियम: सांस्कृतिक प्रतिरोध की आवाज़             सामाजिक सरोकारों के बिना कला उतनी ही हास्यास्पद लगती है, जितनी किसी नग्न आदिवासी के हाथ में...

मैंने आत्महत्या क्यों नहीं की ?

मैंने आत्महत्या क्यों नहीं की ? (‘एकालाप‘ का संदर्भ : बादल सरकार लिखित और निखिल महाजन निर्देशित टेलिथिएटर ‘बाक़ी इतिहास‘… इस नाटक में एक पात्र है सीतानाथ जो आत्महत्या...