February 28, 2026 आब-ओ-हवा ग़ज़ल: लौ और धुआं परचमों में क़ैद होकर रह गया हर रंग है पाक्षिक ब्लॉग आशीष दशोत्तर की कलम से…. परचमों में क़ैद होकर रह गया हर रंग है रंग ज़िन्दगी को तालीम भी देते हैं और तरबीयत भी। रंग होंठों पर... Continue Reading
October 15, 2025 आब-ओ-हवा काव्य हिन्दी-उर्दू शायरी में ‘चराग़’ शम्अ, दीया और दीपक शब्द भी शायरी में बख़ूबी बरते जाते रहे हैं लेकिन हमने इस दीवाली के मौक़े पर चुना है लफ़्ज़ ‘चराग़’ या चिराग़। इस लफ़्ज़ को... Continue Reading