आधुनिक युद्ध और कराहता पर्यावरण

पाक्षिक ब्लॉग विवेक रंजन श्रीवास्तव की कलम से…. आधुनिक युद्ध और कराहता पर्यावरण               प्राचीन काल के युद्धों की स्मृति मात्र ही हमें...

युद्ध के नये मोर्चे और डिजिटल घेराबंदी

विवेक रंजन श्रीवास्तव की कलम से…. युद्ध के नये मोर्चे और डिजिटल घेराबंदी             आज के समय में युद्ध केवल सीमाओं पर टैंकों और...

युद्ध में दुनिया और बुद्ध की प्रासंगिकता

विवेक रंजन श्रीवास्तव विदेशों की यात्राओं पर हैं। इस दौरान वह नियमित रूप से शब्दों को समय दे रहे हैं। आब-ओ-हवा पर विशेष रूप से इस वैचारिकी, नोट्स, अनुभव...

अगर तीसरा युद्ध हुआ तो? …नीरज की यादगार कविता

गूंज बाक़ी… दुनिया के हालात के मद्देनज़र कैसे कोई कविता प्रासंगिक हो जाती है! गोपालदास नीरज की एक कविता जैसे फिर ज़िंदा हो गयी है। दशकों पहले कविता पढ़ते...

आज दुनिया की चुनौतियाँ और सत्याग्रह

विवेक रंजन श्रीवास्तव नवंबर से अमेरिका प्रवास पर हैं और अन्य देशों की यात्राओं पर भी जाने वाले हैं। इस दौरान वह रोज़ाना शब्दों को समय दे रहे हैं।...

एआई की होड़, क्या आर्म्स रेस जैसी?

पाक्षिक ब्लॉग ए. जयजीत की कलम से…. हथियार कारोबार की राह पर एआई कंपनियां?          इन दिनों दुनिया की तमाम बड़ी बहुराष्ट्रीय कंपनियां और विकसित देश...

ग्रीनलैंड: संकट की वैश्विक चुनौती

पाक्षिक ब्लॉग विवेक रंजन श्रीवास्तव की कलम से…. ग्रीनलैंड: संकट की वैश्विक चुनौती              कलाल्लित नुनात, जिसका नाम ग्लोब पर ग्रीनलैंड है, पृथ्वी का...
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