पर्दा है पर्दा

व्यंग्य मुकेश असीमित की कलम से…. पर्दा है पर्दा               राजा विशेष आरामगाह में आराम फ़रमा रहा था। विशेष इसलिए कि वह पहली...

ताकि यहां फिल्में बनें और चंबल के कलाकारों को मिले उड़ान

चंबल इंटरनेशनल फ़िल्म फ़ेस्टिवल 2025: ग्वालियर में दो दिन सिनेमा और पर्यटन पर होगा फ़ोकस ताकि यहां फिल्में बनें और चंबल के कलाकारों को मिले उड़ान      ...

‘इग्नाइटेड माइंड्स’ के अप्रतिम स्वप्न और यह लौह समय

(विधाओं, विषयों व भाषाओं की सीमा से परे.. मानवता के संसार की अनमोल किताब -धरोहर- को हस्तांतरित करने की पहल। जीवन को नये अर्थ, नयी दिशा, नयी सोच देने...

कमलकांत… याद तो होगा आपको यह नाम!

कमलकांत… याद तो होगा आपको यह नाम! शिवपुरी, ग्वालियर और भोपाल को अपनी कर्मभूमि बनाने वाले कमलकांत सक्सेना (05 अक्टूबर 1948—31 अगस्त 2012) की यह 77वीं जयंती है। पत्रकार,...

भाषा का रोब

आदित्य की कलम से…. भाषा का रोब                इंसानों ने लाखों सालों के जंगली जीवन के दौरान आवाज़ निकालने की अपनी क्षमता का...

यादें और सपने… गुरु-शिष्या की पेंटिंग्स ने जमाया रंग

यादें और सपने… गुरु-शिष्या की पेंटिंग्स ने जमाया रंग                चंडीगढ़। पंजाब कला भवन की एम.एस. रंधावा कला दीर्घा में कला गुरु मुकेश...

‘वाद’ के आधार पर नहीं रचा जाता साहित्य: नमिता सिंंह

नमिता सिंह (4 अक्टूबर 1943) … कथा साहित्य का सुपरिचित एवं स्थापित नाम। जनवादी लेखक संघ की पदाधिकारी, प्राध्यापक, ‘वर्तमान साहित्य’ जैसी पत्रिकाओं की संपादक जैसे दायित्वों के बीच...