संकलन : देवदत्त संगेप…. शायरी में यार-दोस्त-अहबाब ये कहाँ की दोस्ती है कि बने हैं दोस्त नासेहकोई चारासाज़ होता कोई ग़म-गुसार होतामिर्ज़ा ग़ालिब ————*———— अगर तुम्हारी अना ही का...
कवियों की भाव-संपदा, विचार-वीथिका और संवेदन-विश्व को खंगालती इस डायरी का मक़सद प्रकाशन पूर्व पाठक-लेखक संवाद बनाना है… जयप्रकाश मानस की कलम से…. पूर्वपाठ — एक कवि की डायरी...
मुंशी प्रेमचंद ने शुरू में (और उसके बाद भी) ‘नवाबराय’ नाम से उर्दू में विशद लेखन किया। हालांकि अब के हिंदी पाठकों तक उनकी उर्दू कहानियां कम ही पहुंचीं।...
मुंशी प्रेमचंद (31.07.1880-08.10.1936) की जयंती के अवसर पर यह वैचारिकी प्रेमचंद के साहित्य का ऐतिहासिक महत्व समझाती है और यह भी कि इस साहित्य को किस तरह संरक्षित किया...