पंडित रतननाथ सरशार एक क़लंदर क़लमकार

गूंज बाक़ी… पिछली पीढ़ियों के यादगार पन्ने हर गुरुवार। पं. रतननाथ सरशार का नाम उर्दू गद्य के पुरोधाओं में लिया जाता है। उनके जीवन व सृजन पर ‘क़लंदर क़लमकार’...

चंद्रकांता: प्रासंगिकता और आलोचना के प्रश्न

गूंज बाक़ी… पिछली पीढ़ियों के यादगार पन्ने हर गुरुवार। वर्षों पहले राजकमल पेपरबैक्स से प्रकाशित ‘चंद्रकांता’ के लिए प्रसिद्ध लेखक-संपादक राजेंद्र यादव ने चालीस से भी अधिक पन्नों की...

सिगरेट… बदनाम औरतें और बाज़ार मालामाल

भवेश दिलशाद की कलम से…. सिगरेट… औरतें बदनाम और बाज़ार मालामाल              जे.के. रॉलिंग की एक फ़ोटो इसी साल अप्रैल में चर्चा में थी,...

हमें ईश्वर की ज़रूरत क्यों है?

गूंज बाक़ी… पिछली पीढ़ियों के यादगार पन्ने हर गुरुवार। इस शृंखला की पहली पेशकश में अपनी भिन्न वैचारिक उष्मा के साथ ही एक प्रासंगिक विचार के संदर्भ में भी...

हरिशंकर परसाई – राजनैतिक व्यंग्य के पुरोधा

पंकज निनाद की कलम से…. हरिशंकर परसाई – राजनैतिक व्यंग्य के पुरोधा             किशोर उम्र में बच्चे सवाल करने लगें, तर्क देने लगें और...

व्यंग्य की लोकधर्मी परंपरा: भारतेंदु से वर्तमान तक

‘मान’ सहज व रोचक अंदाज़ में उस परिदृश्य को सामने लाती है, जो इस शती के पूर्वार्द्ध तक के समाज की तस्वीर रहा है। अंत में कहानी के पारंपरिक...

जब इतिहास ही खो जाये..

मुंशी प्रेमचंद (31.07.1880-08.10.1936) की जयंती के अवसर पर यह वैचारिकी प्रेमचंद के साहित्य का ऐतिहासिक महत्व समझाती है और यह भी कि इस साहित्य को किस तरह संरक्षित किया...

नई कहानी और महिला कथाकार

‘मान’ सहज व रोचक अंदाज़ में उस परिदृश्य को सामने लाती है, जो इस शती के पूर्वार्द्ध तक के समाज की तस्वीर रहा है। अंत में कहानी के पारंपरिक...