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August 14, 2025 आब-ओ-हवा ग़ज़ल: लौ और धुआं वतन की सांसों से वाबस्ता तहरीरों की शायरी आशीष दशोत्तर की कलम से…. वतन की सांसों से वाबस्ता तहरीरों की शायरी यौम-ए-आज़ादी हर दौर में शाइरी का हिस्सा रहा है। हो भी... और पढ़े
July 30, 2025 आब-ओ-हवा ग़ज़ल: लौ और धुआं ग़ज़ल: ख़ास और आम के बीच की बात आशीष दशोत्तर की कलम से…. ग़ज़ल: ख़ास और आम के बीच की बात ख़ुदा-ए-सुख़न मीर कहते हैं-शेर मेरे हैं गो ख़वास-पसंदपर मुझे... और पढ़े