बदली-बदली नज़र आती है दुनिया आवाज़ की

‘मान’ सहज व रोचक अंदाज़ में उस परिदृश्य को सामने लाती है, जो इस शती के पूर्वार्द्ध तक के समाज की तस्वीर रहा है। अंत में कहानी के पारंपरिक...

अली अब्बास उम्मीद के मिसरों पर कहे गये शेर

अली अब्बास उम्मीद के मिसरों पर कहे गये शेर             भोपाल। उस्ताद शायर ज़फ़र सहबाई की सदारत में “सुख़न-सराए” भोपाल के ज़ेरे-एहतमाम ब-यादे डॉक्टर...

पेंटर उकेरता यादें और फोटोग्राफर क्षणभंगुरता!

पेंटर उकेरता यादें और फोटोग्राफर क्षणभंगुरता!              चंडीगढ़। छायाकार विरले क्षणों का सौदागर और पेन्टर होता स्मृतियों का सौदाई, संवेदनशील द्वय रचते हैं निःशब्द...

उत्तराखंड में नफ़रत के ख़िलाफ़ मोर्चा

भारत को जो हिस्सा प्राकृतिक सुंदरता का गढ़ है, वहां राजनीति की कुरूपता भयावह हो रही है! उत्तराखंड में हाल ही हुई चर्चित सांप्रदायिक घटना के बाद प्रेस के...

नौकरशाह रंधावा क्यों हैं आज भी प्रासंगिक?

नौकरशाह रंधावा क्यों हैं आज भी प्रासंगिक?             चंडीगढ़। नगर के बुद्धिजीवियों ने पंजाब कला भवन के सभागार और कला दीर्घा में आयोजित नामचीन...

ताहिर फ़राज़ को ख़िराज

डॉ. आज़म की कलम से…. ताहिर फ़राज़ को ख़िराज             “ताहिर फ़राज़ ने जनता की साइकी, मनोविज्ञान, माइंड सेट, उनकी प्राथमिकता, उनके मानसिक सरोकारों...

बर्फ़ीला तूफ़ान.. हडसन नदी में तैरती बर्फ़, सड़कों पर ढेर

(न्यूयॉर्क से) विवेक रंजन श्रीवास्तव की कलम से…. बर्फ़ीला तूफ़ान.. हडसन नदी में तैरती बर्फ़, सड़कों पर ढेर             जनवरी की तेज़ शीतलहर के...

सलाम मार्क टली… यादें, क़िस्से और किताबें

सलाम मार्क टली… यादें, क़िस्से और किताबें             भारत में अंग्रेज़ी पत्रकारिता का पर्याय कहे गये तो कभी बीबीसी की भारत की आवाज़ तो...

आलोचक वीरेंद्र यादव होने के मायने

शख़्सियत को जानें चंद्रेश्वर की कलम से…. आलोचक वीरेंद्र यादव होने के मायने             अग्रज लेखक-आलोचक वीरेन्द्र यादव से मेरी पहली मुलाक़ात वर्ष 1989...
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