इज़रायल बनाम हमास: नाइंसाफ़ी से लड़तीं आइदा से चर्चा

अपनी संक्षिप्त फ़लीस्तीन यात्रा के दौरान विनीत तिवारी ने आयदा टूमा सुलेमान के साथ जेरूसलम में बातचीत की, यात्रा से लौटकर उसे लिपिबद्ध किया है। लेखक द्वारा उपलब्ध करवाया...

समर शेष है… और चुप्पी विशेष?

प्रतिरोध पंकज निनाद की कलम से…. समर शेष है…               विगत 7 जनवरी को बिलासपुर में गुरु घासीदास केंद्रीय विश्वविद्यालय और साहित्य अकादमी...

ख़राब है इंजन और ड्राइवर बदलने का खेल!

कटाक्ष विवेक रंजन श्रीवास्तव की कलम से…. ख़राब है इंजन और ड्राइवर बदलने का खेल!            इंदौर में इन दिनों ग़ज़ब का द्वंद्व चल रहा...

2025: किताबें इस साल और साहित्य की दिशा

‘मान’ सहज व रोचक अंदाज़ में उस परिदृश्य को सामने लाती है, जो इस शती के पूर्वार्द्ध तक के समाज की तस्वीर रहा है। अंत में कहानी के पारंपरिक...

अदब में अलग भाषा नहीं, परंपरा है

गूंज बाक़ी… इस लेख में साहित्य अकादमी व ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित हिंदी कवि ने भारत व पाकिस्तान के उर्दू साहित्य, प्रगतिवादी दौर के बाद उर्दू साहित्य और हिंदी...

एक सदी बाद भी ‘दिवास्वप्न’ ही है शिक्षा का लक्ष्य!

प्रमोद दीक्षित मलय की कलम से…. एक सदी बाद भी ‘दिवास्वप्न’ ही है शिक्षा का लक्ष्य!             शिक्षा साहित्य में ऐसी पुस्तकें बहुत कम...

एसआईआर के ख़िलाफ़ एक यह एफ़आईआर

प्रसंगवश भवेश दिलशाद की कलम से…. एसआईआर के ख़िलाफ़ एक यह एफ़आईआर              एस.आई.आर… जिसे प्रक्रिया होना चाहिए, उसे नाटक, झमेला या सिरदर्द जैसे...