दरवाज़ा

मुंशी प्रेमचंद ने शुरू में (और उसके बाद भी) ‘नवाबराय’ नाम से उर्दू में विशद लेखन किया। हालांकि अब के हिंदी पाठकों तक उनकी उर्दू कहानियां कम ही पहुंचीं।...

मान

‘मान’ सहज व रोचक अंदाज़ में उस परिदृश्य को सामने लाती है, जो इस शती के पूर्वार्द्ध तक के समाज की तस्वीर रहा है। अंत में कहानी के पारंपरिक...

बेटी बहुत रुलाती है

डॉ. सतीश ‘बब्बा’ की इस कहानी में सरल आम जीवन का कथानक है, इसमें उल्लेख के लायक़ नया कुछ नहीं है। फिर भी प्रस्तुत कहानी का आकर्षण उसकी अत्यंत...

कहानी :- एक प्रोफेसर की हत्या

विक्रम सिंह लिखित कहानी “प्रोफ़ेसर की हत्या” की मज़बूत नींव उसके आरंभ में ही है। हिंदी कहानी में नया-सा अलग हटकर प्रयोग किया है, जो कथा-घटित के प्रति, पात्रों...

कोख

कोख अंबालिका उद्विग्न थी। दासी ने उसके कान में कुछ कहा और फिर मुंह ताकने लगी। – सच कह तुझे भ्रम हुआ होगा क्या, सचमुच तूने अपने कानों से...
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