हिंदी की ज़मीनें…. एक रंगकर्मी की नज़र से समाज (विशेष रूप से हिंदी पट्टी का जनमानस), सत्ता और रंग-संस्कृति की बेबाक पड़ताल। पंकज निनाद की कलम से…. हिंदी रंगमंच:...
‘हिंदी की ज़मीनें’ अंक में प्रसंगवश… इस स्तंभ में 21वीं सदी के 25 वर्षों में से वो 25 भारतीय फ़िल्में, जो टर्निंग पॉइंट साबित हुईं। एक युवा फ़िल्मकार की...
हिंदी की ज़मीनें… वर्तमान समय में दुनिया में कृत्रिम बौद्धिकता शोध ही नहीं, उद्योग ही नहीं बल्कि आम जनजीवन में सर्वाधिक चर्चित विषयों में शुमार है। लेकिन क्या आप...
हिंदी की ज़मीनें… लंदन में बरसों से बसी हुई सुप्रसिद्ध साहित्यकार दिव्या माथुर जी के साथ हैरो-ऑन-हिल्स के एक कैफ़े में विवेक रंजन ने आब-ओ-हवा के लिए की साहित्यिक...