हिंदी रंगमंच: संकट का ग्रहण बनाम रोशनी की उम्मीद

हिंदी की ज़मीनें…. एक रंगकर्मी की नज़र से समाज (विशेष रूप से हिंदी पट्टी का जनमानस), सत्ता और रंग-संस्कृति की बेबाक पड़ताल। पंकज निनाद की कलम से…. हिंदी रंगमंच:...

कॉर्पोरेट, पत्रकारिता, हिंदी

भवेश दिलशाद की कलम से…. कॉर्पोरेट, पत्रकारिता, हिंदी              आपने कभी सुना दो धुर विरोधी पार्टियों मसलन कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी ने गठबंधन...

हिंदी की ज़मीनें: परत-दर-परत

नियमित ब्लॉग भवेश दिलशाद की कलम से…. हिंदी की ज़मीनें: परत-दर-परत             हिंदी पर बात शुरू करने से पहले साफ़ समझिएगा मैं जिसे हिंदी...

‘क्वीन’ के बाद: हिंदी सिनेमा में स्त्री का पुनर्लेखन

‘हिंदी की ज़मीनें’ अंक में प्रसंगवश… इस स्तंभ में 21वीं सदी के 25 वर्षों में से वो 25 भारतीय फ़िल्में, जो टर्निंग पॉइंट साबित हुईं। एक युवा फ़िल्मकार की...

आख़िर हमें ‘एआई मैनेजर’ क्यों चाहिए?

हिंदी की ज़मीनें… वर्तमान समय में दुनिया में कृत्रिम बौद्धिकता शोध ही नहीं, उद्योग ही नहीं बल्कि आम जनजीवन में सर्वाधिक चर्चित विषयों में शुमार है। लेकिन क्या आप...

सूचना के अधिकार या सवालों से परे है HPV वैक्सीन?

हिंदी की ज़मीनें… आमजन को जो टीके लगाये जा रहे हैं, उनकी प्रक्रियाओं से जुड़े मामलों पर एक जनहित याचिका को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने जो रुख़ अपनाया, वह...

वशिष्ठ अनूप व आत्ममुग्धता की शिकार हिंदी ग़ज़ल

नियमित ब्लॉग ज्ञानप्रकाश पांडेय की कलम से…. वशिष्ठ अनूप व आत्ममुग्धता की शिकार हिंदी ग़ज़ल            हां! कुछ अपवादों को छोड़ दिया जाये तो हिंदी...

हिन्दी को बनाने दीजिए मुहब्बत का पुल

नियमित ब्लॉग आशीष दशोत्तर की कलम से…. हिन्दी को बनाने दीजिए मुहब्बत का पुल            ज़ुबानें दिलों के बीच एक राब्ता कायम करती हैं। इंसानों...

दूर देस में हिन्दी के अपनों का मन-1

हिंदी की ज़मीनें… लंदन में बरसों से बसी हुई सुप्रसिद्ध साहित्यकार दिव्या माथुर जी के साथ हैरो-ऑन-हिल्स के एक कैफ़े में विवेक रंजन ने आब-ओ-हवा के लिए की साहित्यिक...
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