कहानी के बदलते स्वरूप

विवेक रंजन श्रीवास्तव की कलम से…. कहानी के बदलते स्वरूप           आज ए.आई. मॉडल, डिजिटल प्रभाव, ऑनलाइन पत्रिकाएँ, सोशल मीडिया आदि कहानी लेखन और प्रसार...

ज्ञानरंजन का जाना

‘मान’ सहज व रोचक अंदाज़ में उस परिदृश्य को सामने लाती है, जो इस शती के पूर्वार्द्ध तक के समाज की तस्वीर रहा है। अंत में कहानी के पारंपरिक...

हंसी ही बचाव और सवाल ही उम्मीद

साहित्य अकादमी सम्मान की रुकी घोषणा पर कटाक्ष विवेक रंजन श्रीवास्तव की कलम से…. हंसी ही बचाव और सवाल ही उम्मीद             सचिव का...

क्यों बार-बार देखी जाये सत्यकाम?

‘याद आते रहेंगे धर्मेंद्र’ सिनेमा नोट्स ब्रज श्रीवास्तव की कलम से…. क्यों बार-बार देखी जाये सत्यकाम?             सत्यकाम (1969), धर्मेंद्र इस फ़िल्म में सिर्फ़...

तो क्या साहित्य सदा राजसत्ता का मुखापेक्षी रहेगा!

विवेक रंजन श्रीवास्तव की कलम से…. तो क्या साहित्य सदा राजसत्ता का मुखापेक्षी रहेगा!             आदर्श स्थिति यही है कि साहित्य को राजनीति से...

भारतीय क्रिकेट: लड़कियों ने लिखा इतिहास, अब मुट्ठी में आसमान

अरुण अर्णव खरे की कलम से…. भारतीय क्रिकेट: लड़कियों ने लिखा इतिहास, अब मुट्ठी में आसमान               भारतीय महिला क्रिकेट टीम ने वह...

असरानी: हास्य अभिनेता के छिपे दर्द को कौन समझा!

स्मरणांजलि विवेक सावरीकर मृदुल की कलम से…. असरानी: हास्य अभिनेता के छिपे दर्द को कौन समझा!             अब असरानी जी के आगे स्वर्गीय लिखना...