कृतित्व के आईने में ज्ञानरंजन

‘मान’ सहज व रोचक अंदाज़ में उस परिदृश्य को सामने लाती है, जो इस शती के पूर्वार्द्ध तक के समाज की तस्वीर रहा है। अंत में कहानी के पारंपरिक...

ज्ञानरंजन का जाना

‘मान’ सहज व रोचक अंदाज़ में उस परिदृश्य को सामने लाती है, जो इस शती के पूर्वार्द्ध तक के समाज की तस्वीर रहा है। अंत में कहानी के पारंपरिक...

ज्ञानरंजन के अंतर्विरोध

साहित्य जगत में चर्चा है अंजुम शर्मा द्वारा ज्ञानरंजन के साक्षात्कार की। प्रतिक्रियाओं के बीच कुछ मुद्दों और प्रवृत्तियों को कठघरे में खड़ा करती है य​ह टिप्पणी। विवेकरंजन मेहता...