स्मारकों का संवाद

विवेक रंजन श्रीवास्तव विदेश यात्राओं पर हैं और युद्ध के चलते लंदन में रुके हुए हैं। इस दौरान वह नियमित रूप से शब्दों को समय दे रहे हैं। आब-ओ-हवा...

कुत्ते

हास्य-व्यंग्य आदित्य की कलम से…. कुत्ते            कुत्तों से संबंधित हाल की कुछ घटनाओं ने भारतीय जनमानस को असमंजस की स्थिति में डाल दिया है।...

रब्त

हास्य-व्यंग्य मुदित रेवातटी की कलम से…. रब्त             परसों बड़ी मेहनत से ग़ज़ल कहने की कोशिश की। जैसे ही मुक़म्मल हुई, फटाक से जाकर...

खेद है – एक राष्ट्रीय भावना का आधुनिक संस्करण

‘मान’ सहज व रोचक अंदाज़ में उस परिदृश्य को सामने लाती है, जो इस शती के पूर्वार्द्ध तक के समाज की तस्वीर रहा है। अंत में कहानी के पारंपरिक...

ख़राब है इंजन और ड्राइवर बदलने का खेल!

कटाक्ष विवेक रंजन श्रीवास्तव की कलम से…. ख़राब है इंजन और ड्राइवर बदलने का खेल!            इंदौर में इन दिनों ग़ज़ब का द्वंद्व चल रहा...

भाई शरद के बहाने

कटाक्ष राजेंद्र प्रसाद सक्सेना की कलम से…. भाई शरद के बहाने            शरद भाई! क्या तुम जैसे दुबले-पतले आदमी के होने या न होने से...

मीटर टेप के साये में-दो पहाड़ों का संवाद

हास्य-व्यंग्य मुकेश असीमित की कलम से…. मीटर टेप के साये में-दो पहाड़ों का संवाद            दो पहाड़ – एक बड़का भैया, एक छुटका भैया बरसों...

हंसी ही बचाव और सवाल ही उम्मीद

साहित्य अकादमी सम्मान की रुकी घोषणा पर कटाक्ष विवेक रंजन श्रीवास्तव की कलम से…. हंसी ही बचाव और सवाल ही उम्मीद             सचिव का...

हिंदी व्यंग्य स्तंभ-लेखन की परंपरा और समकाल

पाक्षिक ब्लॉग अरुण अर्णव खरे की कलम से…. हिंदी व्यंग्य स्तंभ-लेखन की परंपरा और समकाल              हिंदी व्यंग्य को लोकप्रिय बनाने में स्तंभ-लेखन की...
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