शैलेंद्र: कला और सहजता का दुर्लभ संयोग

शख़्सियत को जानिए ज़ाहिद ख़ान की कलम से…. शैलेंद्र: कला और सहजता का दुर्लभ संयोग             भारतीय सिनेमा के सौ साल से ज़्यादा के...

क्यों बार-बार देखी जाये सत्यकाम?

‘याद आते रहेंगे धर्मेंद्र’ सिनेमा नोट्स ब्रज श्रीवास्तव की कलम से…. क्यों बार-बार देखी जाये सत्यकाम?             सत्यकाम (1969), धर्मेंद्र इस फ़िल्म में सिर्फ़...

रफ़ी की आवाज़ में धर्मेंद्र के फ़िल्मी अंदाज़

एक याद बरास्ते गीत-छवि विवेक रंजन श्रीवास्तव की कलम से…. रफ़ी की आवाज़ में धर्मेंद्र के फ़िल्मी अंदाज़             धर्मेंद्र पर लिखा जाये, तो...

सुलक्षणा पंडित ने आख़िर बांधी रे काहे प्रीत?

पाक्षिक ब्लॉग विवेक सावरीकर मृदुल की कलम से…. सुलक्षणा पंडित ने आख़िर बांधी रे काहे प्रीत?             अपने समय की ख़ूबसूरत अदाकारा और गायिका...

मखमली आवाज़ से जादू करने आया फ़नकार: तलत महमूद

पाक्षिक ब्लॉग मिथलेश राय की कलम से…. मखमली आवाज़ से जादू करने आया फ़नकार: तलत महमूद                शहर में कुछ लोग ऐसे भी...

लोकरंग की चाशनी में एस.एन. त्रिपाठी की अमर धुन

पाक्षिक ब्लॉग विवेक सावरीकर मृदुल की कलम से…. लोकरंग की चाशनी में एस.एन. त्रिपाठी की अमर धुन राजस्थान की माटी से निकले वीर योद्धा दुर्गादास राठौड़ पर इसी नाम...

कौन था हिन्दी सिनेमा का पहला ‘जुबली कुमार’

नियमित ब्लॉग मिथलेश राय की कलम से…. कौन था हिन्दी सिनेमा का पहला ‘जुबली कुमार’              बरसात बीत चुकी है। अक्टूबर के पहले सप्ताह...

संध्या शांताराम का वह अनूठा सर्प नृत्य

नियमित ब्लॉग विवेक सावरीकर ‘मृदुल’ की कलम से…. संध्या शांताराम का वह अनूठा सर्प नृत्य               अपने समय की मशहूर और मारूफ़ अभिनेत्री...
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