परवीन शाकिर की मुर्दा उंगलियाँ

गूंज बाक़ी… पिछली पीढ़ियों के यादगार पन्ने हर गुरुवार। परवीन शाकिर पिछली कुछ पीढ़ियों की महबूब शायर रही हैं। उनके अंतिम संस्कार के क्षणों के अहसास को शब्द दिये...
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