आंखें छीनकर तो रोशनी न दिखायी जाये

पाक्षिक ब्लॉग आशीष दशोत्तर की कलम से…. आंखें छीनकर तो रोशनी न दिखायी जाये हिंदुस्तानी परिप्रेक्ष्य में मज़हबी जलसे इस तरह होते हैं जैसे हम हर दिन उठते हैं...

आज रंग है….

हिंदुस्तान यानी एक रंग-रंगीली सरगम। हर सुर, हर रंग एक-दूसरे में घुला-मिला हुआ, रचा-बसा हुआ। यही इंद्रधनुषी धुन देश की तहज़ीब है। प्यार, वाबस्तगी और एका के पैग़ाम सभी...

परचमों में क़ैद होकर रह गया हर रंग है

पाक्षिक ब्लॉग आशीष दशोत्तर की कलम से…. परचमों में क़ैद होकर रह गया हर रंग है रंग ज़िन्दगी को तालीम भी देते हैं और तरबीयत भी। रंग होंठों पर...

अली अब्बास उम्मीद के मिसरों पर कहे गये शेर

अली अब्बास उम्मीद के मिसरों पर कहे गये शेर             भोपाल। उस्ताद शायर ज़फ़र सहबाई की सदारत में “सुख़न-सराए” भोपाल के ज़ेरे-एहतमाम ब-यादे डॉक्टर...

सुबह और सांझ के माथे पर ग़मों की गठरी

पाक्षिक ब्लॉग आशीष दशोत्तर की कलम से…. सुबह और सांझ के माथे पर ग़मों की गठरी             अलसुबह अरमानों को अपनी कांख में दबाकर...

इल्म, तजुर्बा, थ्योरी और अख़्तरुल ईमान

पाक्षिक ब्लॉग सलीम सरमद की कलम से…. इल्म, तजुर्बा, थ्योरी और अख़्तरुल ईमान             ज़िंदगी मुझसे कह रही थी कि उम्र सवालों की जा...

वक़्त के ज़ख़्म और ग़ज़ल का दामन

पाक्षिक ब्लॉग आशीष दशोत्तर की कलम से…. वक़्त के ज़ख़्म और ग़ज़ल का दामन               निहायत सादगीपसंद और दिलचस्प गुफ़्तगू करने वाले ख़ुमार...
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