2025: साहित्य के उत्सव-पुरस्कार-विमर्श और…

‘मान’ सहज व रोचक अंदाज़ में उस परिदृश्य को सामने लाती है, जो इस शती के पूर्वार्द्ध तक के समाज की तस्वीर रहा है। अंत में कहानी के पारंपरिक...

अदब में अलग भाषा नहीं, परंपरा है

गूंज बाक़ी… इस लेख में साहित्य अकादमी व ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित हिंदी कवि ने भारत व पाकिस्तान के उर्दू साहित्य, प्रगतिवादी दौर के बाद उर्दू साहित्य और हिंदी...

शायरी की आलोचना पर पहली व यादगार किताब

पाक्षिक ब्लॉग डॉ. आज़म की कलम से…. शायरी की आलोचना पर पहली व यादगार किताब              यह पुस्तक सर्वप्रथम “शेर-ओ-शायरी” नाम से लिखी गयी...

परवीन शाकिर की मुर्दा उंगलियाँ

गूंज बाक़ी… पिछली पीढ़ियों के यादगार पन्ने हर गुरुवार। परवीन शाकिर पिछली कुछ पीढ़ियों की महबूब शायर रही हैं। उनके अंतिम संस्कार के क्षणों के अहसास को शब्द दिये...

यौम-ए-आज़ादी (स्वतंत्रता दिवस) और उर्दू किताबें

डॉक्टर आज़म की कलम से…. यौम-ए-आज़ादी (स्वतंत्रता दिवस) और उर्दू किताबें               स्वतंत्रता दिवस, देश विभाजन, आज़ादी के बाद के भारत और पाकिस्तान...