परदेस में मूल्य निर्धारण

विवेक रंजन श्रीवास्तव नवंबर से अमेरिका प्रवास पर हैं और अन्य देशों की यात्राओं पर भी जाने वाले हैं। इस दौरान वह रोज़ाना शब्दों को समय दे रहे हैं।...

आलोक चटर्जी: सिगरेट जो धुआं हो गयी

रंगकर्मी आलोक चटर्जी को गये एक बरस हो गया। भवेश दिलशाद की यह टिप्पणी आब-ओ-हवा के अंक 19 में प्रकाशित हुई थी, जिसे प्रसंगवश यहां प्रस्तुत किया जा रहा...

इज़रायल बनाम हमास: नाइंसाफ़ी से लड़तीं आइदा से चर्चा

अपनी संक्षिप्त फ़लीस्तीन यात्रा के दौरान विनीत तिवारी ने आयदा टूमा सुलेमान के साथ जेरूसलम में बातचीत की, यात्रा से लौटकर उसे लिपिबद्ध किया है। लेखक द्वारा उपलब्ध करवाया...

आलोचक वीरेंद्र यादव होने के मायने

शख़्सियत को जानें चंद्रेश्वर की कलम से…. आलोचक वीरेंद्र यादव होने के मायने             अग्रज लेखक-आलोचक वीरेन्द्र यादव से मेरी पहली मुलाक़ात वर्ष 1989...

आज़ाद का स्टाइल उन्हीं से शुरू, उन्हीं पर ख़त्म

पाक्षिक ब्लॉग डॉ. आज़म की कलम से…. आज़ाद का स्टाइल उन्हीं से शुरू, उन्हीं पर ख़त्म “आज़ाद नस्र (गद्य) में शायरी करते हैं और शायरी करते हुए नस्र लिखते...

राज़: कैसे बन गयी कल्ट फिल्म?

21वीं सदी के 25 वर्षों में से वो 25 भारतीय फ़िल्में, जो एक टर्निंग पॉइंट साबित हुईं। एक युवा फ़िल्मकार की दृष्टि से ​चयन और इन फ़िल्मों का दस्तावेज़ीकरण…...

भाषाओं के पार: व्यंग्य का भारतीय संसार-2

पाक्षिक ब्लॉग अरुण अर्णव खरे की कलम से…. भाषाओं के पार: व्यंग्य का भारतीय संसार-2            दक्षिण भारतीय भाषाओं में तमिल-व्यंग्य की परंपरा अत्यंत प्राचीन...

स्त्री-त्रासदी की शाश्वत गाथा फुलिया…

पाक्षिक ब्लॉग नमिता सिंह की कलम से…. स्त्री-त्रासदी की शाश्वत गाथा फुलिया…        आलोचना और कहानी लेखन के क्षेत्र में अस्मिता सिंह का जाना-माना नाम है। लघु-पत्रिकाओं...

जल-जंगल-ज़मीन-हवा और हम

पाक्षिक ब्लॉग विवेक रंजन श्रीवास्तव की कलम से… जल-जंगल-ज़मीन-हवा और हम        जल, जंगल, ज़मीन और हवा के सवाल आज जीवन और अर्थव्यवस्था की धमनियों के प्रश्न...

हिन्दी ग़ज़ल में दृश्य चित्रण की बानगी-2

विजय कुमार स्वर्णकार की कलम से…. हिन्दी ग़ज़ल में दृश्य चित्रण की बानगी-2            पिछले भाग में हमने कुछ ऐसे अशआर की पड़ताल की जिनमें...