रंगकर्मी आलोक चटर्जी को गये एक बरस हो गया। भवेश दिलशाद की यह टिप्पणी आब-ओ-हवा के अंक 19 में प्रकाशित हुई थी, जिसे प्रसंगवश यहां प्रस्तुत किया जा रहा...
अपनी संक्षिप्त फ़लीस्तीन यात्रा के दौरान विनीत तिवारी ने आयदा टूमा सुलेमान के साथ जेरूसलम में बातचीत की, यात्रा से लौटकर उसे लिपिबद्ध किया है। लेखक द्वारा उपलब्ध करवाया...
पाक्षिक ब्लॉग डॉ. आज़म की कलम से…. आज़ाद का स्टाइल उन्हीं से शुरू, उन्हीं पर ख़त्म “आज़ाद नस्र (गद्य) में शायरी करते हैं और शायरी करते हुए नस्र लिखते...
21वीं सदी के 25 वर्षों में से वो 25 भारतीय फ़िल्में, जो एक टर्निंग पॉइंट साबित हुईं। एक युवा फ़िल्मकार की दृष्टि से चयन और इन फ़िल्मों का दस्तावेज़ीकरण…...
पाक्षिक ब्लॉग नमिता सिंह की कलम से…. स्त्री-त्रासदी की शाश्वत गाथा फुलिया… आलोचना और कहानी लेखन के क्षेत्र में अस्मिता सिंह का जाना-माना नाम है। लघु-पत्रिकाओं...