प्यार के दिन ख़ूनख़राबे की तस्वीर!

पाक्षिक ब्लॉग भवेश दिलशाद की कलम से…. प्यार के दिन ख़ूनख़राबे की तस्वीर!             हिंदी सिनेमा ने एक दौर ​देखा जब हिंसा को नायक...

अथ श्री पद्म-पुरस्कारम् प्रपंच कथा

पाक्षिक ब्लॉग भवेश दिलशाद की कलम से…. अथ श्री पद्म-पुरस्कारम् प्रपंच कथा           भारत रत्न तक के चयन पर उंगली उठती है, तब पद्म पुरस्कारों...

शायर बेदख़ल और गुम कैसे हो गया?

पाक्षिक ब्लॉग भवेश दिलशाद की कलम से…. शायर बेदख़ल और गुम कैसे हो गया?             जीवनशैली में बदलाव की साज़िशों, मजबूरियों और हसरतों ने...

लोकतंत्र, सत्तानमाज़ी नागरिक और बंधु-गीतों की याद

पाक्षिक ब्लॉग भवेश दिलशाद की कलम से…. लोकतंत्र, सत्तानमाज़ी नागरिक और बंधु-गीतों की याद            “एक आज के आगे-पीछे लगे हुए हैं दो-दो कल”… क्या...

न ज़िम्मेदार है प्रेस न आज़ाद, फिर भी दिवस?

पाक्षिक ब्लॉग भवेश दिलशाद की कलम से…. न ज़िम्मेदार है प्रेस न आज़ाद, फिर भी दिवस?              ‘पत्रकारिता में जन-विश्वास को मज़बूत करना’ इस...
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