अपनी रचना में पूरे मौजूद विनोद कुमार शुक्ल

याद बाक़ी स्वप्निल श्रीवास्तव की कलम से…. अपनी रचना में पूरे मौजूद विनोद कुमार शुक्ल              जब भी विनोद कुमार शुक्ल की कविताएं पढ़ता...

सड़कों पर सोते लोग, क्या प्रश्न सिर्फ़ अमेरिका का है?

विवेक रंजन श्रीवास्तव नवंबर से अमेरिका प्रवास पर हैं और अन्य देशों की यात्राओं पर भी जाने वाले हैं। इस दौरान वह रोज़ाना शब्दों को समय दे रहे हैं।...

महामना: वामन से विराट की यात्रा

‘मान’ सहज व रोचक अंदाज़ में उस परिदृश्य को सामने लाती है, जो इस शती के पूर्वार्द्ध तक के समाज की तस्वीर रहा है। अंत में कहानी के पारंपरिक...

विनोद कुमार शुक्ल: जो चुपचाप चला गया, पर सबके पास पहुँच गया

डीकोडिंग पोएट्री ब्रज श्रीवास्तव की कलम से…. विनोद कुमार शुक्ल: जो चुपचाप चला गया, पर सबके पास पहुँच गया             जिनके जाने से   ...

स्टेच्यू ऑफ लिबर्टी: सबकी स्वतंत्रता का प्रतीक

विवेक रंजन श्रीवास्तव नवंबर से अमेरिका प्रवास पर हैं और अन्य देशों की यात्राओं पर भी जाने वाले हैं। इस दौरान वह रोज़ाना शब्दों को समय दे रहे हैं।...

काल के कपाल पर

हास्य-व्यंग्य डॉ. मुकेश असीमित की कलम से…. काल के कपाल पर             कहते हैं, काल के कपाल पर पहले से ही हमारा भूत, वर्तमान...

ज्योत्स्ना… तेरी राजी

याद बाक़ी… पिछले दिनों लेखक राजी सेठ हमारे बीच नहीं रहीं, आब-ओ-हवा की ओर से विनम्र श्रद्धांजलि। कथा संसार के साथ ही उनका पत्र साहित्य भी पठनीय और चर्चित...

मोमो

संस्मरण ख़ुदेजा ख़ान की कलम से…. मोमो             कभी-कभी जीवन में अचानक कोई इस तरह दाख़िल हो जाता है कि उसकी उपस्थिति की आदत...

लाल बिंदी वाली इरफ़ाना

याद बाक़ी…संस्मरण (कुछ वर्ष पहले लिखित) रामप्रकाश त्रिपाठी की कलम से…. लाल बिंदी वाली इरफ़ाना              शब्दशिल्पियों के आसपास में नेहा शरद की फ़ेसबुक...

देश में अभूतपूर्व पत्रकारिता का दौर

हास्य-व्यंग्य आदित्य की कलम से…. देश में अभूतपूर्व पत्रकारिता का दौर              बहुत-से लोगों के लिए यह निराशाजनक तथ्य है कि आधुनिक भारत में...
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