बदीउज़्ज़मां, जैसा मैंने उन्हें जाना

याद बाक़ी… यह संस्मरण अकार-68 में प्रकाशित है, जो इस पत्रिका के सहायक संपादक श्री जीवेश के सौजन्य से साभार प्राप्त हुआ। ‘तुम भूल न जाओ उनको…’ बस इसी...

भारत में परिवारवाद

व्यंग्य आदित्य की कलम से…. भारत में परिवारवाद             ब्रह्मांड की उत्पत्ति कैसे हुई? पृथ्वी कैसे बनी? देवता कहाँ से आए? स्वर्ग, नरक और...

परदेस में मूल्य निर्धारण

विवेक रंजन श्रीवास्तव नवंबर से अमेरिका प्रवास पर हैं और अन्य देशों की यात्राओं पर भी जाने वाले हैं। इस दौरान वह रोज़ाना शब्दों को समय दे रहे हैं।...

आदिवासी: अलग दुनिया, समान संघर्ष

विवेक रंजन श्रीवास्तव नवंबर से अमेरिका प्रवास पर हैं और अन्य देशों की यात्राओं पर भी जाने वाले हैं। इस दौरान वह रोज़ाना शब्दों को समय दे रहे हैं।...

हिंदी दिवस के दो उत्सव और न्यूयॉर्क में गूंज

विवेक रंजन श्रीवास्तव नवंबर से अमेरिका प्रवास पर हैं और अन्य देशों की यात्राओं पर भी जाने वाले हैं। इस दौरान वह रोज़ाना शब्दों को समय दे रहे हैं।...

भाई शरद के बहाने

कटाक्ष राजेंद्र प्रसाद सक्सेना की कलम से…. भाई शरद के बहाने            शरद भाई! क्या तुम जैसे दुबले-पतले आदमी के होने या न होने से...

मानव संकल्प की प्रतीक ऐतिहासिक हॉलैंड टनल

विवेक रंजन श्रीवास्तव नवंबर से अमेरिका प्रवास पर हैं और अन्य देशों की यात्राओं पर भी जाने वाले हैं। इस दौरान वह रोज़ाना शब्दों को समय दे रहे हैं।...

नववर्ष पर न्यूयॉर्क के टाइम स्क्वायर पर बॉल ड्रॉप

विवेक रंजन श्रीवास्तव नवंबर से अमेरिका प्रवास पर हैं और अन्य देशों की यात्राओं पर भी जाने वाले हैं। इस दौरान वह रोज़ाना शब्दों को समय दे रहे हैं।...

मीटर टेप के साये में-दो पहाड़ों का संवाद

हास्य-व्यंग्य मुकेश असीमित की कलम से…. मीटर टेप के साये में-दो पहाड़ों का संवाद            दो पहाड़ – एक बड़का भैया, एक छुटका भैया बरसों...
error: Content is protected !!