सुबह और सांझ के माथे पर ग़मों की गठरी

पाक्षिक ब्लॉग आशीष दशोत्तर की कलम से…. सुबह और सांझ के माथे पर ग़मों की गठरी             अलसुबह अरमानों को अपनी कांख में दबाकर...

इल्म, तजुर्बा, थ्योरी और अख़्तरुल ईमान

‘मान’ सहज व रोचक अंदाज़ में उस परिदृश्य को सामने लाती है, जो इस शती के पूर्वार्द्ध तक के समाज की तस्वीर रहा है। अंत में कहानी के पारंपरिक...

ताहिर फ़राज़ को ख़िराज

डॉ. आज़म की कलम से…. ताहिर फ़राज़ को ख़िराज             “ताहिर फ़राज़ ने जनता की साइकी, मनोविज्ञान, माइंड सेट, उनकी प्राथमिकता, उनके मानसिक सरोकारों...

वक़्त के ज़ख़्म और ग़ज़ल का दामन

पाक्षिक ब्लॉग आशीष दशोत्तर की कलम से…. वक़्त के ज़ख़्म और ग़ज़ल का दामन               निहायत सादगीपसंद और दिलचस्प गुफ़्तगू करने वाले ख़ुमार...

जुड़ती कड़ी, सिमटता हिसार और अकबर इलाहाबादी

पाक्षिक ब्लॉग सलीम सरमद की कलम से…. जुड़ती कड़ी, सिमटता हिसार और अकबर इलाहाबादी               शेर का मा’नी वक़्त और हालात के साथ...

किताबी और दुनियावी इल्म के बीच शाइरी

पाक्षिक ब्लॉग आशीष दशोत्तर की कलम से…. किताबी और दुनियावी इल्म के बीच शाइरी             इल्म और शाइरी का क्या तअल्लुक है? इसको लेकर...

फ़ासला, भाषा, उद्देश्य और अदम गौंडवी

नियमित ब्लॉग सलीम सरमद की कलम से…. फ़ासला, भाषा, उद्देश्य और अदम गौंडवी             “गर्म रोटी की महक पागल बना देती है मुझे” इस...