कौन-सी विशेषता व्यंग्य को विधा बनाती है?

साहित्य के कैनवास पर व्यंग्य की दमक को अब शिनाख़्त की ज़रूरत नहीं है। फिर भी प्रश्न उभरता है कि समकाल में व्यंग्य की धार पैनी क्यों महसूस नहीं...
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