इल्म, तजुर्बा, थ्योरी और अख़्तरुल ईमान

‘मान’ सहज व रोचक अंदाज़ में उस परिदृश्य को सामने लाती है, जो इस शती के पूर्वार्द्ध तक के समाज की तस्वीर रहा है। अंत में कहानी के पारंपरिक...

ताहिर फ़राज़ को ख़िराज

डॉ. आज़म की कलम से…. ताहिर फ़राज़ को ख़िराज             “ताहिर फ़राज़ ने जनता की साइकी, मनोविज्ञान, माइंड सेट, उनकी प्राथमिकता, उनके मानसिक सरोकारों...

अदब में अलग भाषा नहीं, परंपरा है

गूंज बाक़ी… इस लेख में साहित्य अकादमी व ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित हिंदी कवि ने भारत व पाकिस्तान के उर्दू साहित्य, प्रगतिवादी दौर के बाद उर्दू साहित्य और हिंदी...

हिन्दी-उर्दू शायरी में ‘चराग़’

शम्अ, दीया और दीपक शब्द भी शायरी में बख़ूबी बरते जाते रहे हैं लेकिन हमने इस दीवाली के मौक़े पर चुना है लफ़्ज़ ‘चराग़’ या चिराग़। इस लफ़्ज़ को...

शहर के जिस्म में गांव की मिट्टी की महक

पाक्षिक ब्लॉग आशीष दशोत्तर की कलम से…. शहर के जिस्म में गांव की मिट्टी की महक              शाइरी अब रवायती मौज़ूआत से अलहदा राहों...

हिन्दी-उर्दू शायरी में ‘आबो-हवा’

‘आबो-हवा’ का सीधा मतलब जलवायु है और शायरी में यह बाहर और भीतर की कैफ़ियत के हवाले से दर्ज होता रहा है। कहीं-कहीं तो यह प्रतीक भी बन जाता...

आवाज़ दो हम एक हैं

संदर्भ: आज़ादी के आंदोलन में तरक़्क़ी-पसंद शायरों का किरदार और उनकी शायरी का योगदान ज़ाहिद ख़ान की कलम से…. आवाज़ दो हम एक हैं          ...

शायरी में यार-दोस्त-अहबाब

संकलन : देवदत्त संगेप…. शायरी में यार-दोस्त-अहबाब ये कहाँ की दोस्ती है कि बने हैं दोस्त नासेहकोई चारासाज़ होता कोई ग़म-गुसार होतामिर्ज़ा ग़ालिब ————*———— अगर तुम्हारी अना ही का...