कितने अभिन्न लोगों को मैंने चिट्ठियां नहीं लिखीं!

कितने अभिन्न लोगों को मैंने चिट्ठियां नहीं लिखीं! “उसके लिए चिट्ठियांभाषा के बन्द दरवाज़ों कोखोलती गयींदरवाज़ा खुला अधखुला रह गयाबन्द हो गया चिट्ठियों का दरवाज़ा” तब गांव में घर...

4PM के बाद द वायर ब्लॉक

4PM के बाद द वायर ब्लॉक एक तरफ़ ऑपरेशन सिंदूर को लेकर सारा दिन समाचार चैनलों/अन्य प्रकाशनों पर लगातार कवरेज जारी है तो दूसरी तरफ़ कुछ समाचार/ओपिनियन हैंडलों आदि...

हर कलाकार इस समय का सामना करे

हर कलाकार इस समय का सामना करे जनवादी लेखक संघ उ.प्र. का दसवाँ राज्य सम्मेलन लखनऊ स्थित कैफ़ी आज़मी एकेडमी में अप्रैल 2025 में आयोजित किया गया। पहले दिन...

कौन किस पाले में? दक्षिण एशिया में जंग का गणित

कौन किस पाले में? दक्षिण एशिया में जंग का गणित छह साल बाद फिर एक बार भारत और पाकिस्तान मुठभेड़ की स्थिति में पहुंच गये हैं। वजह कश्मीर के...

धरती को प्यार, आत्मीयता और सम्मान दें

धरती को प्यार, आत्मीयता और सम्मान दें मानव जीवन में अगर कोई सम्बंध सर्वाधिक उदात्त, गरिमामय, पावन और प्रेमपूर्ण है तो वह है मां और पुत्र का सम्बंध। एक...

ऑपरेशन सिंदूर : क्या भीषण युद्ध का बिगुल है यह?

ऑपरेशन सिंदूर : क्या भीषण युद्ध का बिगुल है यह? आधी रात के बाद भारत ने पाकिस्तान में आतंकी ठिकानों पर हमले बोल दिये। सुबह होने पर पाकिस्तान ने...

गीत अब जगदीश पंकज

गीत अब जगदीश पंकज ख़बरें, बरस रहीं धरती परआसमान बोझिल-बोझिल हैजाने-पहचाने चेहरों परकुछ भी कह पाना मुश्किल है कानाफूसी में उलझी हैंइतनी आदमक़द अफ़वाहेंचलती-फिरती दीख रही हैंदीवारों की कुटिल...

गीत तब – कुमार रवींद्र

गीत तब कुमार रवींद्र अपराधी देव हुएऎसे में क्या करें मंदिर की घंटियाँ उनको तो बजना है बजती हैंकई बार आपा भी तजती हैंधूप मरी भोर-हुएकैसे फिर धीर धरें...

ग़ज़ल अब राजकुमार राज़

ग़ज़ल अब राजकुमार राज़ तुमने दुश्वारियाँ देखीं तो इरादे बदलेहमने मंज़िल ही कभी बदली न रस्ते बदलेफिर कहीं कोई जनाज़ा उठा शाने बदलेखेल था वो ही फ़क़त देखने वाले...

ग़ज़ल तब

ग़ज़ल तब ज़फ़र गोरखपुरी रौशनी परछाईं पैकर आख़िरीदेख लूँ जी भर के मंज़र आख़िरीमैं हवा के झक्कड़ों के दरमियाँऔर तन पर एक चादर आख़िरीज़र्ब इक ठहरे हुए पानी पे...
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