अंक – 52

आब-ओ-हवा – अंक – 52 भाषाओं के साथ ही साहित्य, कला और परिवेश के बीच पुल बनाने की यह कड़ी हिंदी पत्रकारिता के 200 बरस पूरे होने के संदर्भ...

उदन्त मार्तण्ड से लुप्त मेरुदण्ड तक

बादल सरोज की कलम से…. उदन्त मार्तण्ड से लुप्त मेरुदण्ड तक            यूं तो हाल के लगभग डेढ़ दशक भारतीय प्रेस – विशेषकर हिंदीभाषी प्रेस...

जनसंचार शिक्षा के सामने चुनौतियां

प्रो. संजय द्विवेदी की कलम से…. जनसंचार शिक्षा के सामने चुनौतियां            शिक्षा का मूल उद्देश्य व्यक्ति को आत्मनिर्भर, संवेदनशील और मूल्यनिष्ठ नागरिक बनाना है।...

‘दुनिया मुट्ठी में’ या मुट्ठी से फिसलती दुनिया?

पाक्षिक ब्लॉग आशीष दशोत्तर की कलम से…. ‘दुनिया मुट्ठी में’ या मुट्ठी से फिसलती दुनिया? इंसानी ज़िंदगी में बहुत ज़्यादा तब्दीलियां हो चुकी हैं। किसी वक़्त जब टेलीविज़न आया...

‘ऐल्गी ट्री’ बनेंगे शहरों के नये फेफड़े?

पाक्षिक ब्लॉग विवेक रंजन श्रीवास्तव की कलम से…. ‘ऐल्गी ट्री’ बनेंगे शहरों के नये फेफड़े?            कंक्रीट के जंगलों में तब्दील होते जा रहे आधुनिक...

हिंदी पत्रकारिता नहीं, मानसिकता के 200 साल

पेज 1 से आगे………. निबंध अजय शर्मा की कलम से…. हिंदी पत्रकारिता नहीं, मानसिकता के 200 साल             हिंदी पत्रकारिता में “महिला” भी दरअसल...

हास्य-व्यंग्य का शाहकार इब्न-ए-इंशा की यह किताब

पाक्षिक ब्लॉग डॉ. आज़म की कलम से…. हास्य-व्यंग्य का शाहकार इब्न-ए-इंशा की यह किताब “उनकी प्रवाहमयी गद्य शैली ने अनगिनत सुंदर, लेकिन अब अप्रचलित और भुला दिये गये शब्दों...
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