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रघु राय को संगीतमय श्रद्धांजलि: संगीत, मौन और शब्दों से याद किया

एक वाक्य, जिसने रघु राय को रघु राय बनाया

               चंडीगढ़। 6 मई की देर शाम पंजाब कला भवन, चंडीगढ़ में गरिमापूर्ण श्रद्धांजलि सभा में संगीत, लघु चित्र, मौन और शब्दों द्वारा देश के ख्यातिलब्ध छायाकार रघु राय का स्मरण किया गया। पंजाब ललित कला अकादमी तथा चंडीगढ़ ललित कला अकादमी के संयुक्त तत्वावधान में युवा नवदीप सिंह ने बांसुरी वादन से सभा का आग़ाज़ किया। प्रसिद्ध कलाकार और संकल्पनात्मक छायाकार दिवान माना ने रघु राय के साथ बिताये हुए अपने अनुभव सुनाते हुए कहा कि उन्होंने फ़ोटोग्राफ़ी की दुनिया में तो प्रतिमान स्थापित किये ही, बतौर इंसान भी वह बेमिसाल थे।

कार्यक्रम में माना ने कहा कि रघु राय के भीतर मानवता, संगीत प्रेम, वनस्पति, अध्यात्म तथा देशप्रेम कूट-कूट कर भरा था। उनके सजग दृष्टिबोध और फ़ोटोग्राफ़ी के प्रति जुनून ने प्रेस फ़ोटोग्राफ़ी को पैनी दृष्टि प्रदान की। बाद में बतौर फ्रीलांसर भी उनके कार्य अविस्मरणीय रहे हैं। वह देश में कहीं भी जाते थे, तो पौधे ख़रीद लाया करते थे और कहते थे देखो मेरे यहां पूरे देश की मिट्टी है। इसलिए आज मैं यहां पौधे लेकर आया हूं, ताकि श्रद्धांजलि सभा में शामिल मित्रों के यहां उन जैसे वनस्पति प्रेम का विस्तार हो।

‘रघु राय: वेटिंग फ़ॉर द डिवाइन’ की लेखिका सुश्री रचना सिंह ने पुस्तक लेखन के दौरान अपने जुड़ाव का हवाला देते हुए बताया कि उनके लिए उनकी माताश्री का कथन “बिना मरे स्वर्ग नहीं मिलता” एक सबक़ बना रहा और इसी वाक्य ने उन्हें कर्मठ व अपने कार्य के प्रति समर्पित और निष्ठावान बना दिया। उन्होंने आगे कहा कि अपने चित्रों के माध्यम से वह सदा अमर रहेंगे।

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कलाकार और फ़ोटो फ़ीचर के महारथी प्रमोद पुष्करणा ने रघु राय को याद करते हुए उनके बड़े भाई एस. पाल की फ़ोटोग्राफ़ी पाठशाला का उल्लेख किया, जहां से रघु राय की शुरूआत हुई थी। उन्होंने कहा कि रघु राय फ़ोटो की गुणवत्ता से कभी समझौता नहीं करते थे। आगरा के चित्रण में बहुत से चित्र को रिजेक्ट करते हुए उन्होंने मात्र एक ट्रांसपेरेंसी को ही चुना, जिसमें माकूल प्रकाश ने ताजमहल की फ़ोटो पर चार चांद लगा दिये थे। इसी प्रकार भोपाल गैस ट्रेजेडी में उनका चित्र त्रासदी की अभिव्यक्ति का पर्याय बन गया।

कार्यक्रम का संचालन पंजाब ललित कला अकादमी के अध्यक्ष गुरदीप धीमान ने किया तथा आभार प्रदर्शन चंडीगढ़ ललित कला अकादमी के अध्यक्ष भीम मल्होत्रा ने। श्रद्धांजलि सभा में भारी संख्या में फ़ोटोग्राफ़र, कलाकार, साहित्यकार और बुद्धिजीवी शामिल थे। सभा के आरंभ होने से पूर्व सभी आगंतुकों ने रघु राय के चित्र के समक्ष पुष्प अर्पित किये। पंजाब ललित कला अकादमी की ओर से रघु राय के एक चित्र के कुछ प्रिंट भी निशुल्क वितरित किये गये।

(प्रेस विज्ञप्ति — सुभाष अरोड़ा)

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