भाई शरद के बहाने

कटाक्ष राजेंद्र प्रसाद सक्सेना की कलम से…. भाई शरद के बहाने            शरद भाई! क्या तुम जैसे दुबले-पतले आदमी के होने या न होने से...

लाल बिंदी वाली इरफ़ाना

याद बाक़ी…संस्मरण (कुछ वर्ष पहले लिखित) रामप्रकाश त्रिपाठी की कलम से…. लाल बिंदी वाली इरफ़ाना              शब्दशिल्पियों के आसपास में नेहा शरद की फ़ेसबुक...