साहित्य जनमत बनाने के सिवा करे भी क्या: असग़र वजाहत

“साथ, यक़ीं, वाबस्तगी, बिकने थे बेदाम/ आज़ादी जो रख दिया, बंटवारे का नाम”… 1947 में विभाजन की क़ीमत पर आज़ादी मिली। आज हम कितने आज़ाद हैं और कितने विभाजित?...

ओडिसी: इस वक़्त महाकाव्य का पुनर्पाठ?

नियमित कॉलम भवेश दिलशाद की कलम से…. ओडिसी: इस वक़्त महाकाव्य का पुनर्पाठ?              महाकाव्यों का सबसे बड़ा विरसा होता है कि ये देश...

साहित्य की आत्मा और सिनेमा का पर्दा

विवेक रंजन श्रीवास्तव की कलम से…. साहित्य की आत्मा और सिनेमा का पर्दा              लेखकीय भावना के साथ न्याय या निर्देशक का व्यवसायिक रूपांतरण,...
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