आंखें छीनकर तो रोशनी न दिखायी जाये

पाक्षिक ब्लॉग आशीष दशोत्तर की कलम से…. आंखें छीनकर तो रोशनी न दिखायी जाये हिंदुस्तानी परिप्रेक्ष्य में मज़हबी जलसे इस तरह होते हैं जैसे हम हर दिन उठते हैं...

लोककला में क्या कुछ नया होता ही नहीं?

पाक्षिक ब्लॉग शम्पा शाह की कलम से…. लोककला में क्या कुछ नया होता ही नहीं?        पिछली कड़ी में हमने कलावंत कुम्हार कालीपद जी के उस प्रसंग...

बाज़ारों से पहाड़ों तक ‘बर्गन’ के रंग

पाक्षिक ब्लॉग रति सक्सेना की कलम से…. बाज़ारों से पहाड़ों तक ‘बर्गन’ के रंग            बर्गन, नॉर्वे के दक्षिण में बसा छोटा-सा प्रान्त है। ओदवे...

समाज में बदलाव की कथा और एक सवाल

पाक्षिक ब्लॉग नमिता सिंह की कलम से…. समाज में बदलाव की कथा और एक सवाल          लेखिका रीता दास राम की पहचान मूलत: एक संवेदनशील कवयित्री...

बदलती परिभाषा! प्रश्न करना विज्ञान-विरोध नहीं

पाक्षिक ब्लॉग डॉ. आलोक त्रिपाठी की कलम से…. बदलती परिभाषा! प्रश्न करना विज्ञान-विरोध नहीं            जो शुरूआत बेहतर पहचान (detection) से हुई थी, वह धीरे-धीरे...

हिंदुस्तान में उर्दू अदब का हाल मायूस करता है: ज़किया मशहदी

उर्दू अफ़सानानिगारों में महिलाओं के नाम भले ही उंगलियों पर गिने जाने लायक़ हों लेकिन उनका क़द अदब में काफ़ी ऊंचा है। ये नाम बड़े ही एहतराम से लिये...

क्यों बड़ी क्षति है के.एन. पनिक्कर का जाना?

शख़्सियत को जानें मनोज कुलकर्णी की कलम से…. क्यों बड़ी क्षति है के.एन. पनिक्कर का जाना?             यह नयी सदी के शुरूआती बरसों की...

ग़ालिब को महान बनाने वाली पहली किताब

पाक्षिक ब्लॉग डॉ. आज़म की कलम से…. ग़ालिब को महान बनाने वाली पहली किताब मौलाना अल्ताफ़ हुसैन हाली की “यादगार-ए-ग़ालिब” एक बायोग्राफ़िकल और क्रिटिकल किताब है, जो मिर्ज़ा असदुल्लाह...
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