आविष्कारक और सिनेमा का पहला जादूगर

मूक सिनेमा से एल्गोरिदम युग तक आ पहुंचे, सवा सदी से भी पुराने हो चुके सिनेमा को कितना जानते हैं आप? परदे पर न जाने कितनी ही कहानियां आपने...

क्यों ख़ास है ‘हासिल’? और यह न होती तो?

21वीं सदी के 25 वर्षों में से वो 25 भारतीय फ़िल्में, जो एक टर्निंग पॉइंट साबित हुईं। एक युवा फ़िल्मकार की दृष्टि से ​चयन और इन फ़िल्मों का दस्तावेज़ीकरण…...

एनसीईआरटी बनाम न्यायपालिका

​आदित्य की कलम से…. एनसीईआरटी बनाम न्यायपालिका              सर्वोच्च न्यायालय ने जमकर लताड़ लगायी। एनसीईआरटी जैसी नख-दंत-विहीन संस्थान की ऐसी हिमाकत! कि न्यायालय का...

ज्ञानप्रकाश विवेक: हिंदी ग़ज़ल का ऊटपटांगपन

पाक्षिक ब्लॉग ज्ञानप्रकाश पांडेय की कलम से…. ज्ञानप्रकाश विवेक: हिंदी ग़ज़ल का ऊटपटांगपन            ज्ञानप्रकाश विवेक हिन्दी साहित्य में किसी परिचय के मोहताज नहीं हैं।...

एक अध्ययन: कैरिकेचर और कार्टूनिंग से मीम्स तक

पाक्षिक ब्लॉग अरुण अर्णव खरे की कलम से…. एक अध्ययन: कैरिकेचर और कार्टूनिंग से मीम्स तक               परंपरागत रूप से व्यंग्य को शब्द-केंद्रित...

नामचीन साहित्यकारों के चुटीले प्रसंग-2

पाक्षिक ब्लॉग विवेक मेहता की कलम से…. नामचीन साहित्यकारों के चुटीले प्रसंग-2            हिंदी साहित्य जगत में एक ऐसा दौर था, जब बड़े हस्ताक्षर प्रतिष्ठित...
  • March 15, 2026
  • आब-ओ-हवा

अंक – 47

आब-ओ-हवा – अंक – 47 भाषाओं के साथ ही साहित्य, कला और परिवेश के बीच पुल बनाने की इस कड़ी में युद्धों के इस समय में एक हस्तक्षेप। शांति...

स्मारकों का संवाद

विवेक रंजन श्रीवास्तव विदेश यात्राओं पर हैं और युद्ध के चलते लंदन में रुके हुए हैं। इस दौरान वह नियमित रूप से शब्दों को समय दे रहे हैं। आब-ओ-हवा...

युद्ध के नये मोर्चे और डिजिटल घेराबंदी

विवेक रंजन श्रीवास्तव की कलम से…. युद्ध के नये मोर्चे और डिजिटल घेराबंदी             आज के समय में युद्ध केवल सीमाओं पर टैंकों और...

इस्लाम: सत्ता संघर्ष और वैश्विक शांति की राह

विवेक रंजन श्रीवास्तव विदेश यात्राओं पर हैं और युद्ध के चलते लंदन में रुके हुए हैं। इस दौरान वह नियमित रूप से शब्दों को समय दे रहे हैं। आब-ओ-हवा...
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