जो है मेरा है, अपने समय का सच है

मेरे हिस्से का क़िस्सा… आब-ओ-हवा पर एक विशेष शृंखला। उम्र और सृजन का बेहतरीन सफ़र कर चुके हस्ताक्षरों की कहानी, उन्हीं की ज़ुबानी। इस सिलसिले की शुरूआत भोपाल के...

कमलकांत जी, अनघ जी.. प्यास और अंधेरे से भिड़ंत

संदर्भ: आती हुई तिथियों पर कमलकांत सक्सेना (05.10.1948-31.08.2012) और महेश अनघ (14.09.1947-04.12.2012) को याद करने के अवसर विशेष.. पाक्षिक ब्लॉग भवेश दिलशाद की कलम से…. कमलकांत जी, अनघ जी.....
error: Content is protected !!