इंद्रधनुष-9 : नोमान शौक़

इंद्रधनुष-9 : नोमान शौक़ “मेरे नज़दीक इस मुश्किल वक़्त में शायरी करना क़ब्रिस्तान में वायलिन बजाने जैसा है।” यह कहना रहा है हमारे समय के मक़बूल शायर नोमान शौक़...

मीना कुमारी की शायरी: ख़ामोशी व ठहराव​

विवेक रंजन श्रीवास्तव की कलम से…. मीना कुमारी की शायरी: ख़ामोशी व ठहराव              सिनेमा के सुनहरे पर्दे पर जब-जब ट्रेजेडी और अभिनय की...

इंद्रधनुष-7 : डॉ. तारिक़ क़मर

इंद्रधनुष-7 : डॉ. तारिक़ क़मर   ‘नयी ग़ज़ल में इमेजरी’ विषय पर अपना शोध प्रबंध लिखने वाले डॉ. तारिक़ क़मर उर्दू शाइरी में अपनी एक ख़ास पहचान बना चुके...

कब तक दुष्यंत की पीठ खुजाएगी ‘हिंदी ग़ज़ल’?

आलोचना ज्ञानप्रकाश पांडेय की कलम से…. कब तक दुष्यंत की पीठ खुजाएगी ‘हिंदी ग़ज़ल’?              मैं जानता हूँ दुष्यंत पर कुछ भी निगेटिव लिखकर...

ज़ालिम दौर में मासूम शाइरी की आवाज़

पाक्षिक ब्लॉग आशीष दशोत्तर की कलम से…. ज़ालिम दौर में मासूम शाइरी की आवाज़               शाइरी किसी की ख़ुशामद नहीं करती, उंगली उठाती...

ग़ज़ल तब : महेश अनघ

संदर्भ : 14 सितंबर 1947, महेश अनघ की जयंती ग़ज़ल तब : महेश अनघ 1 मुस्कानों का आना जाना पल दो चार रहा एक पुराना छाला दिल पर पहरेदार...
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