January 15, 2026 आब-ओ-हवा हम बोलेंगे नाम बदलने की समझ बनाम सनक पाक्षिक ब्लॉग भवेश दिलशाद की कलम से…. नाम बदलने की सनक बनाम समझ एक राग है काफ़ी। जितना कर्णप्रिय राग है, इसका नाम... Continue Reading
November 30, 2025 आब-ओ-हवा हम बोलेंगे लोकतंत्र, सत्तानमाज़ी नागरिक और बंधु-गीतों की याद पाक्षिक ब्लॉग भवेश दिलशाद की कलम से…. लोकतंत्र, सत्तानमाज़ी नागरिक और बंधु-गीतों की याद “एक आज के आगे-पीछे लगे हुए हैं दो-दो कल”… क्या... Continue Reading
November 14, 2025 आब-ओ-हवा हम बोलेंगे न ज़िम्मेदार है प्रेस न आज़ाद, फिर भी दिवस? पाक्षिक ब्लॉग भवेश दिलशाद की कलम से…. न ज़िम्मेदार है प्रेस न आज़ाद, फिर भी दिवस? ‘पत्रकारिता में जन-विश्वास को मज़बूत करना’ इस... Continue Reading