हरिऔध के काव्य में संवेदना और संदेश

निबंध विवेक रंजन श्रीवास्तव की कलम से…. हरिऔध के काव्य में संवेदना और संदेश              साहित्य की दुनिया में कुछ रचनाकार ऐसे होते हैं...

आशा भोसले: हमेशा जवां आवाज़ का ख़ामोश होना!

डॉ. दिनेश पाठक की कलम से…. आशा भोसले: हमेशा जवां आवाज़ का ख़ामोश होना!            आशा भोसले ने एक सुदीर्घ और यशस्वी जीवन जिया। उन्होंने...

अब कहाँ मिलते हैं दादाजी जैसे लोग!

संस्मरण ब्रज श्रीवास्तव की कलम से…. अब कहाँ मिलते हैं दादाजी जैसे लोग!              दादाजी परिवार का एक अत्यंत प्रिय और गरिमामय रिश्ता होते...

बदीउज़्ज़मां, जैसा मैंने उन्हें जाना

याद बाक़ी… यह संस्मरण अकार-68 में प्रकाशित है, जो इस पत्रिका के सहायक संपादक श्री जीवेश के सौजन्य से साभार प्राप्त हुआ। ‘तुम भूल न जाओ उनको…’ बस इसी...

आंटी का जाना

7 जनवरी 2026 को श्रीमती मोहिनी माथुर को देहावसान हो गया। ख्यातिनाम पत्रकार, लेखक राजेंद्र माथुर की जीवनसंगिनी श्रीमती माथुर अध्यापक एवं साहित्यसेवी के रूप में अपनी यादें छोड़...

अपनी रचना में पूरे मौजूद विनोद कुमार शुक्ल

याद बाक़ी स्वप्निल श्रीवास्तव की कलम से…. अपनी रचना में पूरे मौजूद विनोद कुमार शुक्ल              जब भी विनोद कुमार शुक्ल की कविताएं पढ़ता...

ज्योत्स्ना… तेरी राजी

याद बाक़ी… पिछले दिनों लेखक राजी सेठ हमारे बीच नहीं रहीं, आब-ओ-हवा की ओर से विनम्र श्रद्धांजलि। कथा संसार के साथ ही उनका पत्र साहित्य भी पठनीय और चर्चित...

मोमो

संस्मरण ख़ुदेजा ख़ान की कलम से…. मोमो             कभी-कभी जीवन में अचानक कोई इस तरह दाख़िल हो जाता है कि उसकी उपस्थिति की आदत...
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