परवीन शाकिर की मुर्दा उंगलियाँ

गूंज बाक़ी… पिछली पीढ़ियों के यादगार पन्ने हर गुरुवार। परवीन शाकिर पिछली कुछ पीढ़ियों की महबूब शायर रही हैं। उनके अंतिम संस्कार के क्षणों के अहसास को शब्द दिये...

कायस्थों की लिपि कैथी – इतिहास, वर्तमान और भविष्य

प्रसंगवश: दीवाली के बाद आने वाली दूज पर कायस्थ समुदाय में चित्रगुप्त पूजन की परंपरा है। इस तिथि पर कायस्थ समुदाय में विशेष रूप काग़ज़, कलम और दवात की...

दीपक/प्रकाश के विषय पर 10 समकालीन गद्य कविताएं

दीपक, प्रकाश शब्द और भाव के इर्द-गिर्द ये कविताएं बुनी गयी हैं। समकालीन गद्य कविता की दुनिया में ये सभी कवि अपनी पहचान बना रहे हैं या बना पाये...

विदेशों में दीपावली: प्रकाश का वैश्विक उत्सव

मधूलिका श्रीवास्तव की कलम से…. विदेशों में दीपावली: प्रकाश का वैश्विक उत्सव                 दीपावली केवल भारत का नहीं, बल्कि अब पूरी दुनिया...

उल्लू बनो-बनाओ, लक्ष्मी जी को प्रसन्न करो

विवेक रंजन श्रीवास्तव की कलम से…. उल्लू बनो बनाओ, लक्ष्मी जी को प्रसन्न करो             किशमिश, काजू, बादाम सब महज़ 300 रु. किलो, फ़ेसबुक...

‘चराग़’ के विषय पर चार शायरों की ग़ज़लें

‘मान’ सहज व रोचक अंदाज़ में उस परिदृश्य को सामने लाती है, जो इस शती के पूर्वार्द्ध तक के समाज की तस्वीर रहा है। अंत में कहानी के पारंपरिक...

काश! हम वैसे ही होते

नियमित ब्लॉग आलोक कुमार मिश्रा की कलम से…. काश! हम वैसे ही होते            बहुत दिनों से ये विचार मेरे मन में उथल-पुथल मचाये हुए...

कौन था हिन्दी सिनेमा का पहला ‘जुबली कुमार’

नियमित ब्लॉग मिथलेश राय की कलम से…. कौन था हिन्दी सिनेमा का पहला ‘जुबली कुमार’              बरसात बीत चुकी है। अक्टूबर के पहले सप्ताह...
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