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एक शाम हिंदी ग़ज़ल की किताब के नाम

                 भोपाल। “अगर आप लोग ग़ज़लें कह रहे हैं, तो वह लोगों तक क्यों नहीं पहुंच रहीं। आप कहते रहिए, किताबें लाते रहिए क्या फ़र्क पड़ रहा है!” दुष्यंत कुमार स्मारक पांडुलिपि संग्रहालय, भोपाल में आयोजित पुस्तक लोकार्पण समारोह के अवसर पर अध्यक्षीय वक्तव्य में वरिष्ठ पत्रकार विजयदत्त श्रीधर ने अपने उद्बोधन में हिंदी ग़ज़ल से यह शिकायत दर्ज करवायी। उन्होंने दुष्यंत और अदम गोंडवी के शेर कोट करते हुए यह भी कहा कि इन दो शायरों के बाद हिंदी में किसी ग़ज़लकार की शायरी आम लोगों की ज़ुबान पर चढ़ी नहीं, इसकी चिंता की जाना चाहिए।

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में चर्चित कथाकार पंकज सुबीर ने कहा, “समकालीन हिंदी ग़ज़ल, पाँच दशक: पांँच क़दम’ पुस्तक में दुष्यंत के बाद की हिंदी ग़ज़ल के 50 सालों की यात्रा की झलक मिलती है। इस तरह के संकलन करने वाले संपादक आम तौर से दो ढाई पेज का संपादकीय लिखकर ख़ुद को संपादक के रूप में प्रचारित कर लेते हैं, लेकिन इस पुस्तक का लगभग 40 पृष्ठों में फैला संपादकीय महत्वपूर्ण और विचारोत्तेजक है।”

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वरिष्ठ जनधर्मी कवि, आलोचक और इस पुस्तक के संपादक राजा अवस्थी ने भी विस्तार से अपनी बात रखी और कहा कि आज की ग़ज़ल अपने समय का वास्तविक विपक्ष है और हिंदी के जिन पांँच कवियों की ग़ज़लों को पुस्तक में शामिल किया गया है, देवेंद्र आर्य, ओम प्रकाश यती, कमलेश भट्ट कमल, महेश अग्रवाल और विनय मिश्र रचनाओं से अपने समय, संदर्भों और वैश्विक संवेदनाओं की प्रभावपूर्ण उपस्थिति दर्ज कराते हैं।

कवि आलोचक विनय मिश्र ने अपने वक्तव्य में कहा दुष्यंत के बाद की ग़ज़ल की ज़मीन को उर्वर बनाने का कार्य इन प्रतिनिधि कवियों ने किया है और आलोचना की अनदेखी के बावजूद आज की ग़ज़ल प्रेम, प्रतिरोध और पर्यावरण की संवादधर्मी कविता है।

वरिष्ठ कवि आलोचक देवेंद्र आर्य ने वक्तव्य में शहरयार के एक शेर का हवाला देते हुए कहा, आलोचना का नज़रिया हिंदी ग़ज़ल के प्रति संकुचित रहा है और है।

इससे पहले उपस्थित अतिथियों का स्वागत करते हुए आयोजक और दुष्यंत कुमार के सुपुत्र और कवि आलोक दुष्यंत ने दुष्यंत के समय और उनकी रचनाधर्मिता की चर्चा करते हुए कहा कि आज की ग़ज़लें दुष्यंत की परंपरा का विस्तार हैं।

कार्यक्रम के दूसरे चरण में इस पुस्तक में उपस्थित सभी कवियों ने अपनी अपनी दो-दो प्रतिनिधि ग़ज़लों का पाठ किया। कार्यक्रम में भोपाल के कई महत्वपूर्ण साहित्यकार मयंक श्रीवास्तव, डॉ. रामवल्लभ आचार्य, डॉ. आरती, भवेश दिलशाद, मनोज जैन मधुर, सलीम सरमद आदि उपस्थित रहे।

संग्रहालय की सचिव करुणा राजुरकर ने कार्यक्रम के पूर्व अतिथि कवियों को दुष्यंत वीथिका और अन्य वीथिकाओं का अवलोकन करवाया। इस समारोह की अध्यक्षता पद्मश्री से सम्मानित विजयदत्त श्रीधर ने की। कार्यक्रम का प्रभावपूर्ण और सफल संचालन युवा कवयित्री विशाखा राजुरकर और धन्यवाद ज्ञापन संस्था के अध्यक्ष रामराव वामनकर ने किया।

— प्रेस विज्ञप्ति

2 comments on “एक शाम हिंदी ग़ज़ल की किताब के नाम

  1. भोपाल के आयोजन की बढ़िया रपट आब-ओ-हवाने प्रकाशित की है। यह ई-पत्रिका बेहतर काम कर रही है। भवेश और उनकी टीम को बधाई और शुभकामनाएं!

    देवेन्द्र आर्य, गोरखपुर

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