March 15, 2026 आब-ओ-हवा ग़ज़ल: लौ और धुआं आंखें छीनकर तो रोशनी न दिखायी जाये पाक्षिक ब्लॉग आशीष दशोत्तर की कलम से…. आंखें छीनकर तो रोशनी न दिखायी जाये हिंदुस्तानी परिप्रेक्ष्य में मज़हबी जलसे इस तरह होते हैं जैसे हम हर दिन उठते हैं... Continue Reading
February 28, 2026 आब-ओ-हवा ग़ज़ल: लौ और धुआं परचमों में क़ैद होकर रह गया हर रंग है पाक्षिक ब्लॉग आशीष दशोत्तर की कलम से…. परचमों में क़ैद होकर रह गया हर रंग है रंग ज़िन्दगी को तालीम भी देते हैं और तरबीयत भी। रंग होंठों पर... Continue Reading
November 30, 2025 आब-ओ-हवा ग़ज़ल: लौ और धुआं लकदक बाज़ार में गुमसुम किरदार पाक्षिक ब्लॉग आशीष दशोत्तर की कलम से…. लकदक बाज़ार में गुमसुम किरदार फ़िक्रो-फ़न के ऐतबार से शाइरी ने नये मौज़ूआत को हर वक़्त... Continue Reading
November 14, 2025 आब-ओ-हवा ग़ज़ल: लौ और धुआं किताबी और दुनियावी इल्म के बीच शाइरी पाक्षिक ब्लॉग आशीष दशोत्तर की कलम से…. किताबी और दुनियावी इल्म के बीच शाइरी इल्म और शाइरी का क्या तअल्लुक है? इसको लेकर... Continue Reading