March 31, 2026 आब-ओ-हवा टिप्पणी ममतालु अकादमी ‘मान’ सहज व रोचक अंदाज़ में उस परिदृश्य को सामने लाती है, जो इस शती के पूर्वार्द्ध तक के समाज की तस्वीर रहा है। अंत में कहानी के पारंपरिक... Continue Reading
November 24, 2025 आब-ओ-हवा टिप्पणी तो क्या साहित्य सदा राजसत्ता का मुखापेक्षी रहेगा! विवेक रंजन श्रीवास्तव की कलम से…. तो क्या साहित्य सदा राजसत्ता का मुखापेक्षी रहेगा! आदर्श स्थिति यही है कि साहित्य को राजनीति से... Continue Reading