आज अमेरिका और टू किल अ मॉकिंगबर्ड

मासिक ब्लॉग निशांत कौशिक की कलम से…. आज अमेरिका और टू किल अ मॉकिंगबर्ड          टू किल अ मॉकिंगबर्ड, जब हार्पर ली ने 1960 में यह...

कितनी फ़िल्मी है हमारी डिप्लोमैसी!

पाक्षिक ब्लॉग भवेश दिलशाद की कलम से…. कितनी फ़िल्मी है हमारी डिप्लोमैसी!              विदेश नीति, कूटनीतिक संबंधों में हम इस क़दर कमज़ोर हैं कि...

सुल्तान अहमद: ख़ूबियां बनाम ख़ामियां

पाक्षिक ब्लॉग ज्ञानप्रकाश पांडेय की कलम से…. सुल्तान अहमद: ख़ूबियां बनाम ख़ामियां           इस बाज़ारवादी दौर में जब हर व्यक्ति अपनी क़ीमत बढ़ाने में लगा...

नामचीन साहित्यकारों के रोचक कटाक्ष-3

पाक्षिक ब्लॉग विवेक मेहता की कलम से…. नामचीन साहित्यकारों के रोचक कटाक्ष-3             पिछली दो कड़ियों में हिंदी साहित्य जगत के स्वनामधन्य लेखकों/कलमकारों के...

रंग दे बसंती: समाज व लोकतंत्र की ताकत

21वीं सदी के 25 वर्षों में से वो 25 भारतीय फ़िल्में, जो टर्निंग पॉइंट साबित हुईं। एक युवा फ़िल्मकार की दृष्टि से चयन और इन फ़िल्मों का दस्तावेज़ीकरण… पाक्षिक...

चुनावी बवंडर, सियासी धुरंधर और बेचारा सिलेंडर

हास्य-व्यंग्य आदित्य की कलम से…. चुनावी बवंडर, सियासी धुरंधर और बेचारा सिलेंडर              ईरान युद्ध ने पूरे विश्व में आग लगा दी है। पूरी...

साबरमती के संत का स्वर: ‘ईश्वर अल्लाह तेरे नाम’

विवेक रंजन श्रीवास्तव की कलम से…. साबरमती के संत का स्वर: ‘ईश्वर अल्लाह तेरे नाम’              भारतीय स्वाधीनता संग्राम के इतिहास में कुछ धुनें...

विश्व सिनेमा का इज़रायली नैरैटिव समझें

विश्व सिनेमा का इज़रायली नैरैटिव समझें              अमेरिका, इज़रायल, ईरान, फ़लीस्तीन… यानी संघर्षरत क्षेत्रों के बारे में सोशल मीडिया पर लगातार लेखन और विचार...
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